जब मेने पेहली बार हास्य कविता लिखी।by Rohit Sharma
जब मेने पेहली बार हास्य कविता लिखी।
मेरी पत्नि बोली आज का खाना तुम ही बनाना।
ओर तुरन्त अपनी सहेली के यहा हो ली।
वहा बोली, हमारे पति इस उम्र मे सढिया गये हे
ओर कुछ नही मिला तो हास्य कवि हो गये हे।
शब्दो के बाण शेया पे लेटे लेटे अपनी सुध बुध खो गये हे।
वेसे ही हास्य कवि कम थे जो ये भी add हो गये हे।
क्यो कर ते हो भेजा फ़्राइ, क्या तुम्हे रात भर नीद नही आयी।
जो सुबह सुबह शुरु हो गये हो। 2 पन्नो की कविता पे इतने मुग्ध हो गये हो।
क्या teaching profession से उब गये हो । क्या अपने आप को अशोक चक्रधर समघ रहे हो।
फ़ोक्ट मे ही अपने आप को हास्य कवि बोल रहे हो।
क्या घर का राशन कविता सुना के लाओगे।
हास्य सम्मेलन मे जा के अपनी कविता पे वाह वाहि पाओगे।
क्या लोगो से ताली बजवाओगे।
ओर घर वापिस खाली हाथ आयोगे।
छोटु की स्कूल फ़ीस भरनी हे। गेस का cylinder भी खाली हे।
घर मे राशन आज ओर कल का हे, 2 दिन बाद वो भी खाली हे।
कुछ सोचा हे या मन मे अभी भी दुविधा हे
कवि बनने का भूत उतरा या अभी भी सर पे चडा हे।
कुछ तो भविष्य के बारे मे सोचो। ओर हास्य कवि बनना छोडो।
2-4 साल बाद retired हो जाओगे। ओर आधी pension ही घर लाओगे।
मेह्गैई का inflation ऐसे ही बढता जायेगा।
ओर रुप्या dollar के आगे गिरता जायेगा।
आलु प्याज का दाम युन्ही बढता जायेगा।
क्या तब तुम्हारा घर हास्य कवीता से चल पायेगा।
तुम तो चले जाओगे कवि सम्मेलन मे्। ओर गुद गुदा आओगे सभी को कवि सम्मेलन मे्।
चन्द तालीयो की आवाज़ ओर वाह वाहि से खुश हो जाओगे कवि सम्मेलन मे्।
पर घर से गरिबी ओर मेहन्गैइ का दानव ले जाओगे कवि सम्मेलन मे्।
इस सच्चाई से कब तक भाग पाओगे।
ओर life insurance कहा से कर पाओगे।
बुढापे मे जब लाठी चाहीये होगी
तो premium कहाँ से लाओगे।
हास्य कवि का ज़नुन छोडो ओर अधयापक ही रहो।
बच्चो का भविष्य सुधारो।
ओर घर मे राशन तो भरो।
कविता बाद मे लिख लेना।
अभी तो घर मे ध्यान धरो।
खाली वक़्त मे तुम पढ लेना।
अभी मेरे साथ चलो।
अभी मेरे साथ चलो।
by Rohit Sharma


