ज्ञान.कोम by Rohit Sharma

January 25, 2008

नई सड़क

नई सडक

सत्ता कि गलियरोन से निकल्ती है नई सडक
हर छोटे शहर के चोउराहे मे होति है ईक नई सडक
सुबह सुबह कि चय से खुल् ती है नई सडक
कुंठित मर्यादाओ के थपडो कि बनती है नई सडक

उजाड़ ज़िदग़ी को भर सक ज़ीनें का नाम है नई सडक
नेताओं को गाढ़ी कमई का साधन है नई सडक
पोलिस वालो कि जेबें भरपई का रस्ता है नइ सडक
आम आदमी के लिऐ बनती है नइ सडक।

थंड मे गरिब को अपना रूप दिखाती हौ ये नई सडक
गर्मी मे अमीरों को झुलसाती है ये नई सडक
कई रूपो मे पाई जाती है ये नैइ सडक
ग़ड्घे ग़ड्घे इस् के रूप सोन्दर्य कि पेह्चान है
उबड ख़बड रास्तों कि शान है ये नै सडक।

ट्रफ़िक जाम मे बहुत रुलाति हे ये नई सडक
दूर दूर तक पोलिस वाले को ढुनढ्वाति है ये नई सडक

रोहित शर्मा

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